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VITILIGO IS NOT AN INFECTIOUS DISEASE

विटिलिगो ( सफेद दाग ) vitiligo ( Leucoderma ) 

हॉलीवुड के पॉप स्टॉर माइकल जैक्सन विटिलिगो यानी सफेद दाग की बीमारी से पीड़ित थे. उन्होंने सर्जरी की मदद से अपने शरीर की पूरी त्वचा को ही सफेद करवा लिया था. 
दरअसल, यह पिगमेंटेशन डिसऑर्डर है, जो सामान्यता ल्यूकोडर्मा के नाम से भी जाना जाता है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया भर की करीब 2% जनसंख्या ल्यूकोडर्मा से पीड़ित है.
भारत में इसके रोगी सबसे अधिक है आइए जानते हैं. इसके उपचार को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ

विटिलिगो ( सफेद दाग ) किया है – what is vitiligo ( Leucoderma ) in Hindi

विटिलिगो त्वचा विकार है, जिसमें त्वचा को रंग प्रदान करने वाली मेंलेनोसाइट कोशिकाओं का निर्माण नहीं हो पाता या वे नष्ट हो जाती है. शरीर के किसी भी हिस्से की त्वचा की ऊपरी परत एपिडर्मिस में बेतरतीब ढंग से किसी भी आकार के सफेद चकत्ते पड़ जाते हैं.

वास्तव में हमारी त्वचा का रंग कैसा होगा, यह मेलेनिन की सघनता पर निर्भर करता है. मेलेनीन तत्व अधिक मात्रा में होने पर त्वचा का रंग सांवला और कम होने पर गोरा होता है. विटिलिगो ऑटो-इम्यून डिजीज है, जो किसी भी उम्र में हो सकता है.

इसमें शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता उल्टा असर करती है. यह हमारे शरीर को ही नुकसान पहुंचाने लगती है और त्वचा का रंग बनाने वाले टिशूज मेलानोसाइट के खिलाफ हो जाती है. त्वचा में मेलेनिन खत्म होने लगता है और उस जगह पर सफेद दाग या पैच पड़ जाते हैं. 

यह दाग शुरू में हल्के पीले रंग के छोटे-छोटे होते हैं, जो धीरे-धीरे बड़े और सफेद चकते में बदल जाते हैं. कुछ लोग विटिलिगो को कुष्ठ रोग या वैसा ही संक्रामक रोग जानकर अभिशाप मानते हैं, जो गलत है.
समय पर उचित उपचार से ठीक हो सकता है या इस पर रोक लगाई जा सकती है. अन्यथा कई मामलों में महीने भर में यह कहीं से भी शुरू होकर चेहरे, पलको और शरीर के अधिकांश हिस्से को कवर कर लेती है.

विटिलिगो ( सफेद दाग ) के लक्षण- vitiligo ( Leucoderma ) symptoms in Hindi 

त्वचा पर सफेद धब्बे ज्यादातर हाथ और चेहरे आदि जगह पर होते हैं. सूर्य के प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक संकट, नाभि, कमर, मलाशय, जननांगों आदि क्षेत्र के पास छोटे सफेद धब्बे.  

विटिलिगो ( सफेद दाग ) के कारण- vitiligo ( Leucoderma ) causes in Hindi

शरीर में मेलेनिन कोशिकाओं की कमी, केमिकल एक्स्पोज़र से, अनुवांशिक कारणों से, 30% मामलों में पारिवारिक इतिहास, अत्यधिक तनाव या चिंता, गैस्ट्रिक विकार, गंभीर पीलिया, खून की कमी, लीवर इन्फेक्शन और पाचन तंत्र में खराबी, थायराइड आदि.
क्रॉनिक डिजीज में दी जाने वाली दवाइयों से हमारे शरीर की इम्युनिटी प्रभावित होती है और यह ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर हो सकता है. खाने पीने की गलत आदतों से, जैसे- भोजन में कैल्शियम तथा अन्य पोषक तत्वों की कमी, दूध, मांसाहारी पदार्थ का एक साथ सेवन करना विटिलिगो के कारण हो सकते हैं.

विटिलिगो ( सफेद दाग ) का उपचार | vitiligo ( Leucoderma ) treatment in Hindi |

विटिलिगो लाइलाज बीमारी नहीं है. जरूरत है तो बस इस तो अच्छा विकार के प्रति सजग होने की. त्वचा पर कहीं भी पैच दिखे, तो छुपाए नहीं. तुरंत जांच कराएं. शुरू में उपचार हो, तो परिणाम अच्छे मिलते हैं.

पैच ज्यादा समय से हो, तो समय लंबा लगता है. विशेषज्ञ मरीज की केस हिस्ट्री और चकत्ते वाली त्वचा की बायोप्सी टेस्ट के आधार पर विटिलिगो की स्थिति का पता लगाते हैं. आमतौर पर मरीजों का उपचार अल्ट्रावायलेट किरणों की शिकायत से किया जाता है, जिससे त्वचा का रंग दोबारा आ जाता है.

सफेद दाग का सर्जरी से इलाज

सफेद दाग के उपचार के लिए अब सर्जरी की जाने लगी है. जिन लोगों की त्वचा पर सफेद दाग पिछले 1 साल से फैले नहीं है, उन पर सामान्य त्वचा का पैच लेकर ग्राफ्टिंग सर्जरी की जाती है. इससे त्वचा की ऊपरी लेयर में रंग बनाने वाले मेलानोसाइट्स कोशिकाएं अंदर जाकर त्वचा में सुधार लाती है. 

रोग की स्थिति के आधार पर सक्शन ब्लिस्टर ग्राफ्टिंग, melanocyte सस्पेंशन, प्लेटलेट रिच प्लाजमा आदि सर्जरी तकनीक की मदद ली जाती है. स्थिति के आधार पर इसका निर्णय होता है. 

ब्लीचिंग है अंतिम उपचार : सफेद दाग 60% से अधिक त्वचा में फैल जाए और ठीक होने की संभावना बहुत कम रह जाए तब विशेषण डिपिगमेंटेशन तकनीक अपनाने की सलाह देते हैं.
इसमें पूरे शरीर की त्वचा का रंग इतना हल्का कर दिया जाता है कि वह एक जैसी लगने लगती है. त्वचा पर हाइड्रोकिनोंन के मोनोबेंजोन इथर को दिन में दो बार तक लगाया जाता है. 

जरूरी सलाह : त्वचा के रंग में आए किसी भी तरह के बदलाव को अनदेखा ना करें, ना ही इस से छुपाए. तुरंत तवाचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें और पूरी जांच कराएं. सफेद दाग ठीक होने में समय लगता है. धैर्य बनाए, कोर्स पूरा होने तक दवाइयां ले और रुटीन चेकअप कराते रहे.

याद रखें : वीटीलोगो रोग-लेप्रोसी, सोरायसिस या कैंसिर नहीं. सफेद दाग ना तो किसी के छूने से फैलता है और ना ही शारीरिक संबंध बनाने से. इससे व्यक्ति की जान को कोई खतरा नहीं है.

विटिलिगो ( सफेद दाग ) की जटिलताएं – vitiligo ( Leucoderma ) complications in Hindi

विटिलिगो होने से कई परेशानियां हो सकती है. विटिलिगो से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए निम्न जटिलताएं हो सकती है.

  1. मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना,
  2. स्किन कैंसर और सनबर्न की संभावना, 
  3. आंखों की बीमारियां जैसे IRAs,
  4. सूजन व जलन की संभावना, 
  5. सुनने की क्षमता में कमी इत्यादि.

विटिलिगो ( सफेद दाग )  में परहेज – what to avoid during vitiligo ( Leucoderma ) in Hindi?

यह वह खाद पदार्थ है जिनको विटिलिगो के दौरान खाने से बचना चाहिए: 
फल जैसे – तरबूज, खरबूज, संतरा, करोंदा, अमरूद, सीताफल, काजू, सूखा आलूबुखारा आदि. 
सब्जियां जैसे – इमली, पपीता, अजमोद, टमाटर, बैगन, नींबू, लहसुन आदि. 
दूध उत्पाद, जैसे – छाछ, दूध, दहिया छेना आदि.
अन्य खाद्य पदार्थ, जैसे – चॉकलेट, कॉफी, जंक फूड, कार्बोनेटेड पेय पदार्थ, तीखी और मसालेदार आहार जैसे, अचार आदि. 

विटिलिगो ( सफेद दाग ) में क्या खाना चाहिए? – what to eat during vitiligo ( Leucoderma ) in Hindi

नीचे कुछ प्रमुख खाद्य पदार्थों की लिस्ट दी गई है, जिसे विटिलिगो से प्रभावित लोगों को अपने आहार में जोड़ लेना चाहिए – 
सब्जियां, जैसे – प्याज, पालक, चुकंदर, मेथी, गाजर, मूली, आदि.
फल, जैसे – आम, अंगूर, अखरोट, खुबानी, पपीता, खजूर आदि. 
अन्य खाद्य पदार्थ, जैसे – गेहूं, आलू, देसी घी, लाल मिर्च, चना, गुड़, पिस्ता, बदाम आदि.

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