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Water retention is swelling with bloating

वाटर रिटेंशन किया है ( what is water retention in Hindi ) 

कुछ महिला में प्रायः देखने को आता है कि अचानक उनका शरीर फूलता जा रहा है. पैरों और आंखों के नीचे, चेहरे पर एक प्रकार की सूजन रहती है, तो समझ लीजिए कि वह water retention की शिकार है, यानी शरीर में पानी भरा हुआ है. 

यदि किसी स्त्री का वजन सुबह को कम और शाम को ज्यादा हो जाता है, तो यह वाटर रिटेंशन यानी जल प्रतिधारण का लक्षण हो सकता है. इसके कारण पैरों, हाथों, चेहरे और पेट की मांसपेशियां सूज जाती है.

water retention, फ्लुएड रिटेंशन, एडिमा और यदि सरल भाषा में कहें, तो शरीर के अंगों में पानी का जमा हो जाना. इसके कारण शरीर के कुछ अंगों में सूजन आ जाती है. ऐसा तब होता है जब हमारा शरीर मिनरल के स्तर को संतुलित नहीं कर पाता.

वाटर रिटेंशन के लक्षण ( water retention symptoms in Hindi ) 

पानी वाटर रिटेंशन को मेडिकल टर्म में एडिमा कहा जाता है. इस स्थिति के कारण रक्त से पानी का स्त्राव शरीर के टिशू और कोशिकाओं में होता है. इसके कारण सूजन आ जाती है, खासकर पेट पर. 
कई बार इसकी वजह से पैरों, पांव, बाहों और आंखों के नीचे भी सूजन आ जाती है. पैरों में दर्द होता है और सूजन भी आ जाती है. वजन का अचानक कम या ज्यादा होना त्वचा पर निशान बनना तथा हाइपो थायराइड वॉटर रिटेंशन के प्रमुख लक्षण हैं. 

वाटर रिटेंशन के कारण ( water retention causes in Hindi ) 

महिलाओं में वाटर रिटेंशन होने की कई वजह है, जैसे- नम मौसम के कारण शरीर पर रिएक्शन होना, मासिक चक्र के कारण होने वाले हार्मोनल बदलाव, प्रेगनेंसी, मेनोपॉज और ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के साइड इफेक्ट, पोषक तत्वों की कमी, अत्यधिक नमक का सेवन, हाइपोथायराइड, हार्ट या लीवर में गड़बड़ी भी वाटर रिटेंशन की वजह हो सकती है. 

पानी वाटर रिटेंशन है या नहीं, इसका पता मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, लीवर व किडनी फंक्शन टेस्ट, छाती के एक्सरे या इलेक्ट्रोकॉर्डियोग्राम आदि से पता लगाया जा सकता है ताकि पता चल सके कि हार्ट, लीवर या किडनी में कोई विकार तो नहीं है.

वाटर रिटेंशन का इलाज ( water retention treatment in Hindi ) 

अत्याधिक नमक का सेवन : वाटर रिटेंशन का एक मुख्य कारण अत्यधिक नमक का सेवन करना है. नमक में मुख्य तत्व सोडियम होता है, जिसके बहुत अत्यधिक होने पर उसे शरीर पानी के साथ मिला देता है.

नमक से प्यास अधिक लगती है और शरीर इस पानी को अपने अंदर ही रख लेता है. ऐसे में नमक कम करें. अचार, मसालेदार, नमकीन ना खाएं. कोला जैसे पेय पदार्थ से दूर रहें तथा लंबे समय तक ना खड़े रहने के बजाय पैरों को थोड़ा उठाकर बैठने से सूजन से बचा जा सकता है.

संतुलित भोजन ले 

ऐसे फल खाएं, जिनमें पोटेशियम व विटामिन बी कंपलेक्स भरपूर हो, जैसे केला, पपीता और नाशपाती. खट्टे फल संतरा और अनानास. बदाम व अखरोट जैसे सूखे मेवे भी वाटर रिटेंशन को कम करने में उपयोगी है. हरी पत्तेदार सब्जियों को आहार में लें. 

एक्सरसाइज करें 

नियमित 30 मिनट एक्सरसाइज करें. इससे शरीर को डिटॉक्सिफाई होने में मदद मिलेगी और रक्त का बहाव भी सही रहेगा. शारीरिक गतिविधियां वाटर रिटेंशन की समस्या को कम करती है. पैदल चलना स्विमिंग करना साइकिल चलाना आदि वर्कआउट करें. 

थायरॉइड की वजह से भी होती है वॉटर रिटेंशन की समस्या 

सबसे आम वजह है प्री-मेंस्ट्रूअल पीरियड के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव. पीरियड शुरू होने के 5 से 10 दिन पहले हर महिला इस परेशानी से गुजरती है. उनका पेट फूल जाता है, चेहरे व पांव में सूजन और भारीपन आ जाता है.

कई महिलाओं का वजन भी इस दौरान बढ़ जाता है. इसके अतिरिक्त थायराइड की वजह से भी यह होता है, जिसके कारण पैरों व चेहरे पर सूजन आ जाती है. किडनी के कार्य में कोई परेशानी व यूरिन से अत्यधिक मात्रा में प्रोटीन के निकलने की वजह से भी हो जाता है. 

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